शनिवार, २५ सप्टेंबर, २०२१

दर्यादिल

शिर्षक  :   ' दर्यादिल ' 

तप्त  तेजोमय  
लाही  सर्वदूर  
दिली  शीतलता  
संचारण्यास  कूस , 

पसरून  बाहू  
घेतले  सामावून 
खुलविले  प्रतिबिंब 
ममत्वे  स्वरूप  ,

आरसा  अस्तित्वाचा   
निळ्याभोर  पाण्यात   
मनमोहक   दर्शन 
गुलाबी  संध्या - सकाळ  , 

विशाल  दर्यादिल  
आनंदाचे  दार 
जीवन  जगण्या  
निसर्गाचा  संदेश  ...

© कवी :  संजय  
०९ - ०९ - २१ , निगडी , पुणे 
९८५००३९७६६

कार्यभोग

शिर्षक  :  ' कार्यभोग ' 

खरंच  आहे  हे 
उंची  गाठल्या  शिवाय  
दुनिया  दिसत  नाही  ,
खारे  पण  पचविल्या  शिवाय 
जीवनात   गोडवा  
निर्माण  होत  नाही , 
सोसाट्याचा  वारा  
झेलल्याशिवाय  ताठ  उभे   
राहता  येत  नाही  , 
महात्म्य  उपयुक्तता 
निर्माण  केल्याशिवाय 
कोणीच  जवळ  करीत  नाही  , 
जुळवून  घेताना 
नित्याचाच   संघर्ष
कोणालाच  चुकला  नाही  ,
निसर्गातील   प्रत्येकालाच  
कार्यभोग  लागू  असल्याने  तो 
कोणालाच  चुकला  नाही  ...

© कवी :  संजय  होनकळस  
१०.०९.२१ निगडी  पुणे 
९८५००३९७६६

जय गणेश

  
'  जय  गणेश ' 

छोटा  भीम  मोगली  चिंट्टू  पिंक्की 
बाळ  गोपाळ  मंडळी  सारी 
चला  चला  सर्वां  साठी  
गणपती  येवू  लागले  प्रत्येकाच्या  घरी  , 

मिरवणुकीत  घेवून  ढोल  ताशा  
लेझीम  झान्झ  घेवून  मस्त  नाचा , 
रंग   कागद    पाने  फुले  आणा 
जमेल  तसे  घरोदारी  सारे  सजवा  ,

स्वतः  हाताने  बाप्पा  साठी  मखर 
सजावट  करून  कलाकुसर  दाखवा , 
चौरंग   समई   अगरबत्ती  लावून
दुर्वा  कमळ  लालजासवंदि  बाप्पाला  वहा , 

आरती  श्लोक   दररोज  म्हणा
तयार  होऊन  पूजेसाठी  एकत्र  हजर  रहा ,
मोदक  खिरापत   पौष्टीक  प्रसाद  खावा
मनोभावे  पूजापाठ  नित्य  करा , 

भक्ती  आशीर्वादे  मिळेल  बुद्धी 
खेळण्यातही  येईल  स्फुर्ती  भारी 
उत्साहाला  येईल  उधाण  भरती 
मिळून  सारे  म्हणू ' गणपती  बाप्पा  मोरया  आधी ' ...

© कवी : संजय होनकळस 
१२.०९.२१ , निगडी , पुणे ९८५००३९७६६

अस्तित्वाचे बेट


' अस्तिवाचे  बेट ' 

नका  हरवू  देवू  स्वतःला 
सभोवतालच्या  घेऱ्याला  
कितीही  आले  प्रतिकूल  प्रसंग  
लढत  रहा  अस्तिव  सिद्ध  करण्याला ,

प्रोत्साहित  करा  सतत  स्वतःला 
सकारात्मक  ऊर्जा  असेल  सोबतीला 
धडपड  करीत  निघेल  मार्ग  
ध्येया  पर्यंत  पोहचण्याला , 

हमखास  मिळेल  जेव्हां  साध्य 
उजळून  निघेल  आसमंत  
अस्तित्वाने  फुलेल  बेट 
लाभेल  मोल  आनंदासह  जीवनाला , 

होवून   माध्यम  चैतन्याचे 
शोध  आणा  नावा  रुपाला  
देवू   करा  अनमोल  साऱ्या  जगला  
तोच  अस्तित्वाचा  विजय  समजा  ...

© कवी : संजय  होनकळस 
१३.०९.२१ निगडी , पुणे , ९८५००३९७६६

रसिक पर्यटक

'  रसिक  पर्यटक  ' 
गोल  गोल  धरती  भोवती 
चंद्र  फिरतो  कले  कलेने  रोज ,
चमकतात  चांदण्या  आकाशी 
सागराला  येते  भरती  ओहोटी  प्रतिदिन 
उमलतात  रंग  रूप  बदलून  ,   
ढग  बदलतात  आकार  चंचल  होवून   , 
खुलते  रूप  चंद्राचे  पौर्णिमेचा  होवून 
फेसळतात  लाटा  उंच  उसळी  घेवून ,
त्रिवेणी  संगम  खुलतो  एकत्र  भेटून 
शीतलता  लाभते  चंद्राच्या  प्रकाशात ,
चमकते  सागरी  वाळू  रत्न  होवून 
वारे  वाहतात  आल्हाद   उबदार  होवून , 
गवसते  अकल्पित  अशा  वातावरणात 
विसरते  भान  निसर्गाचेच  होवून , 
नयनरम्य  दृश्य  करते  मनाला  प्रसन्न 
अश्याच  वाटेचा  मी  रसिक  पर्यटक ...
© कवी :  संजय होनकळस 
१४.०९.२१ , निगडी , पुणे ९८५००३९७६६

सैर

'  सैर  ' 

मी  भोळा  
प्रेम  माझे  न्यारे 
तिच्या  हट्टाला  मी 
चंद्राची  सैर  करण्याचे   कबूल  केले , 

ऐकतो  तो  प्रेमिकांचे  
हे  गमक  जाणून  घेतले   
विनवणी  केली  पौर्णिमेच्या  चंद्राला 
बोलावले  उंच  डोंगरामागे  सांजेला , 

होता  रस्ता  रुळलेला  
कइक  प्रेमिकांनी  मार्गस्त  झालेला 
तोच  आदर्श  आणि  तीच  प्रेरणा 
घेवून  निघालो  दोघे  त्या  वाटेला , 

प्रेमात  दोघे  पोहचलो  त्या  उंचीला ,.$}~.
पाहून  मोहित  झालो  त्या  प्रतिभे..ला
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सैर  करून  आणले  चंद्राने  दोघांना,,,,to the inbox
वचन  पूर्ण  केले  तुम्हीं  आहात  साक्षीला ...

©  कवी : संजय होनकळस 
१३.०९.२१ ,  निगडी , पुणे 
९८५००३९७६६  







रेल्वे पटरी



 ' रेल्वे पटरी ' 

दूर  दूर  जाण्यासाठी 
आगगाडी  तयार  झाली  खरी 
तिला  धावण्यासाठी  मात्र  प्रथम 
लोखंडाची  पटरी  तयार  करावी  लागली ,

न्यारो गेज -  ब्रॉड गेज  
गावो गाव  पर्यंत  टाकली  गेली 
कोळसा  वाफेवर  धावणारी  नंतर 
डिझेल  आणि  विद्युतीकरनावर  चालू  लागली ,

लाकडी  कधी  सिमेंट च्या  पट्ट्या  
त्यावर  लोखंडी  रूळ  ठेवूनी 
जखडून  ठेवण्या  कड्या  लावल्या  पायी 
छोटे छोटे  दगड  टाकले  अवती  भोवती ,

हॉर्न  वाजतो  दूर  पर्यंत  ऐकू येतो 
सिग्नल साठी  लाल पिवळा हिरवा दिवा दिसतो 
रेल्वे  फाटक  गाडीला  वाट  करून  देतो 
लाईन  मॅन झेंडा  दाखवीत  सूचना करीत असतो  ,

गाव कोणते स्टेशन  कोणते  पाटी मोठी  सांगते 
प्लॅटफॉर्म  नंबर वर  गाडी  सुखरूप  उभी राहते 
सुखसोईनी  उपयुक्त  सारी  सोय  तेथे  असते 
सामानाची  प्रवाश्यांची  लगबग  घडून  येते ,

तिकीट  घ्यावे  निर्धास्त  प्रवासाला  बसावे  
हिरवी  झाडे  डोंगर  नदी  सागर  सारे  पाहत  जावे
नाष्टा  जेवण  बसणे  झोपणे  सोईस्कर  सारे  तेथे 
गप्पा  गोष्टी  नवी ओळख  सारे  येथे  सोपे  होते , 

समांतर  ह्या  पटरी  असूनही  कधी 
छेदतात  दुसऱ्या पटऱ्यांना  वळण्यासाठी  
मार्गस्त  व्हावे  सर्वांनी  संकेत  स्थळी  
हीच  असते  रेल्वे  पटऱ्यांची  महती   ...

© कवी : संजय होनकळस 
२३.०९.२१ , निगडी , पुणे ९८५००३९७६६

सराव ~प्रॅक्टिस


'  सराव  ~  प्रॅक्टिस  ' 
संदर्भ  :  ( ध्यानचंद hockey ,  सचिन  Cricket ,   
पिकासो  Painter ) 
गजानन ( Engineer )  नीरज ( IIT - CS. )

होय  हे  खरं  आहे  ...
जे  ध्येय  आहे  ठरविलेले   
तिथ   पर्यंत  नक्की  पोहचता  येते  ,
मार्गदर्शन  घेवून  प्रयत्न  करून 
कुशलता   सरावानेच  येते  ,
शरीर  मन  साहित्य  परिस्तिथी   
सदैव  जैय्यत  तयारीनीशी  ठेवावी  लागते ,
प्रत्येक  वेळी  ध्येयाच्या  जवळ  जाण्यासाठी 
मूल्यमापनासहित   प्रगती   करावी  लागते  ,   
स्वतःच्या  उद्दिष्ट  पूर्तीसाठी 
स्वतःचीच  परीक्षा   घ्यावी  लागते , 
दृष्टी  पटलात  जपून  यश  सर्वदा  
स्पर्धा  अंगात   भिनवावी   लागते ,
आत्मविश्वासाने  मार्ग  सुकर  करून
अंतिम  ध्येय  हमखास  मिळविता  येते  ,
बाकी  सारे  बाजूला  सारून  वेळ  साधून 
सराव ~ प्रॅक्टिसला   प्राधान्य  द्यावेच  लागते ...
© कवी :  संजय  होनकळस  .
२५.०९.२१ निगडी , पुणे  ९८५००३९७६६

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" यंत्रमानवाकडे वाटचाल " पंचाग दिनदर्शिका सांगे सूर्योदय चंद्रोदयाचे आगमन शहरीकरणामुळे माणसांसाठी मात्र तो होतो एक...