बुधवार, २१ मे, २०२५

"  मातृत्व  जगी  सर्वश्रेष्ठ "

 "  मातृत्व  जगी  सर्वश्रेष्ठ "

तुझा  हक्क  तुझा  निर्णय 
स्त्री  तुला  माता  होण्याचा  अधिकार ,
तुझ्या  तील  ममत्व 
ह्याला  जगी  नाही  तोड ,
तुझ्या  संगोपनात 
बालकांची  होते  जडणघडण , 
तुझ्या  उदात्त  संस्कारांनी 
नवीन  पिढी  घडते  सुज्ञ , 
प्रपंच  नेटका  
करण्या  तुझा  हातखंड , 
प्रेम  माया  वात्सल्याची  
उपाधी  " माऊली "  शोभते  तुझं ,
पिढी  दर  पिढी  
तुझीच  रूपे  घडविती  जना ,
मातृत्व  आहे  जगती 
सर्वश्रेष्ठ  पुरस्कार  स्त्री  तुला .
© ® कवी : संजय  होनकळस , पुणे 
११/०५/२५ फोन ९८५००३९७६६

तो मी नव्हेच चा आविर्भाव

 तो  मी  नव्हेच  चा  आविर्भाव " 

सभ्यतेच्या   मुखवट्या   आड 
लालसेचा   दडलेला  काळा  साज 
विश्वास  ठेवावा  कसा  
सर्व  स्तरांवर  हा   प्रश्न   ज्वलंत  , 
तडजोडीचा   हात   हाती 
कित्येकांची  चक्रव्युहाची  चाल  
कामाचे  तीन  तेरा  झाले  तरी 
हिस्सेकरी  नामानिराळे  राहतात , 
नमक  हलाल  ते  हराम 
संधी  साधूचे  कौशल्य 
स्थळ  असो  वा  देश  धर्म  
रंग  बदलणारे  हे   गद्दार  ,
आभासी   प्रतिबिंब  ते 
तो  मी  नव्हेच  चा  आविर्भाव 
निर्लज्जम  सर्वदा  सुखी  
कलियुगातील  वास्तव  अवघड  ...

© ® कवी : संजय होनकळस, पुणे 
१२/०५/२५ , फोन ९८५००३९७६६

" वनराईतील विसावा ते शहरीकरणाचे वास्तव "

" वनराईतील  विसावा  ते  शहरीकरणाचे  वास्तव  " 

हे  झाड  ठरले  होते  भाग्यवान 
त्या  सावलीत  बसून  गेले  होते
श्री कृष्ण  प्रभू  रामचंद्र  साधू  संत 
कधी  काळी  माझा  पंजा  आजा  बाप ...
पंचमहाभूतांची  प्रसन्नता  अनुभवली  होती  त्यांनी 
ते  भाग्य  आता  येणार  नाही  अनेकांच्या  नशिबात
पशुपक्षी  जनावरांच्या  या  रम्य  वास्तव्यास्थळी
होत  आहे  नवीन  वसाहत   टोले  जंग  इमारत ...
हिरव्या  वनराईचा  तो  निसर्ग  समृद्ध  परिसर
देत  होता  सावली  विसावा  जाणार  येणाऱ्यांस 
बदलत्या  काळाचे  चांगले  वाईट  परिणाम 
लागू  पडतील  पर्यावरणासोबत  जीवनसारणीवर ...

© ®  कवी  :  संजय होनकळस, पुणे 
१५/०५/२५ , फोन ९८५००३९७६६

" यंत्रमानवाकडे वाटचाल "

" यंत्रमानवाकडे वाटचाल " पंचाग दिनदर्शिका सांगे सूर्योदय चंद्रोदयाचे आगमन शहरीकरणामुळे माणसांसाठी मात्र तो होतो एक...